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भारत में चौथी तिमाही में रोजगार परिदृश्य मजबूत, बदलती भूमिकाएं और कौशल तय कर रहे हैं नई भर्तियों की दिशा
नई दिल्ली, भारत, 8 सितंबर 2026: मैनपावरग्रुप के नवीनतम एम्प्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के अनुसार, वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में प्रवेश के साथ भारत में नियुक्तियों की रफ्तार मजबूत हुई है। भारत में 3,055 नियोक्ताओं के बीच 1 से 31 जुलाई 2026 के दौरान किए गए सर्वे के अनुसार, Q4 2026 के लिए नेट एम्प्लॉयमेंट आउटलुक (NEO) 54% रहा। यह पिछली तिमाही की तुलना में 6 प्रतिशत अंक और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अंक अधिक है। वैश्विक स्तर पर रोजगार परिदृश्य के मामले में भारत सबसे आगे है और इसका NEO वैश्विक औसत से 25 प्रतिशत अंक अधिक है।
भारत में 65% नियोक्ता अक्टूबर से दिसंबर के बीच अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 11% नियोक्ताओं को कर्मचारियों की संख्या में कमी की उम्मीद है। वहीं, 24% नियोक्ताओं का अनुमान है कि उनके कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की प्रमुख वजह कंपनियों का विस्तार है, जबकि कर्मचारियों की संख्या घटाने के पीछे ऑटोमेशन/टेक्नोलॉजी और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख कारण हैं।
मुख्य आंकड़ों के पीछे एक ऐसे वर्कफोर्स की तस्वीर सामने आती है जो तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाने वाले नियोक्ताओं में से 69% ने बदलती भूमिकाओं और कौशल आवश्यकताओं को भर्ती का कारण बताया। इसमें नए क्षेत्रों में विस्तार और तेजी से विकसित हो रही तकनीक के कारण आवश्यक नई विशेषज्ञताएं भी शामिल हैं।
मैनपावरग्रुप इंडिया एंड मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी ने कहा, “Q4 2026 में प्रवेश के साथ भारत में नियोक्ताओं का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। नेट एम्प्लॉयमेंट आउटलुक 54% तक पहुंच गया है, जो पिछली तिमाही से छह अंक और पिछले वर्ष की समान अवधि से 11 अंक अधिक है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर अन्य सभी बाजारों से मजबूती से आगे बना हुआ है और वैश्विक औसत से 25 अंक ऊपर है।”
उन्होंने कहा, “इस वृद्धि की प्रकृति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। नियोक्ता केवल कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि अपने वर्कफोर्स के स्वरूप पर भी पुनर्विचार कर रहे हैं। लगभग 70% नियोक्ता बदलती भूमिकाओं और कौशल की जरूरतों के अनुरूप भर्ती कर रहे हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लगातार विस्तार के साथ-साथ फाइनेंस एंड इंश्योरेंस और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि से प्रतिभाशाली कर्मचारियों की मांग बनी हुई है।”
उन्होंने आगे कहा कि एआई आधारित वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन, कौशल की कमी और उम्मीदवारों की अपेक्षाओं और नौकरियों की आवश्यकताओं के बीच अंतर जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत में रोजगार का समग्र परिदृश्य आत्मविश्वास और उद्देश्यपूर्ण वृद्धि का बना हुआ है।
गुलाटी ने कहा, “MEOS सर्वे रिपोर्ट केवल नियुक्तियों के स्तर में बदलाव नहीं, बल्कि भर्ती के पीछे की सोच में बदलाव को भी दर्शाती है। आज की भर्ती का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि बदलती दुनिया के लिए आवश्यक क्षमताओं का निर्माण करना है। भारतभर में नियोक्ता अपने वर्कफोर्स को अधिक रणनीतिक तरीके से तैयार कर रहे हैं और केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय क्षमता निर्माण पर अधिक जोर दे रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया भी तेज हो रही है। 57% नियोक्ताओं ने बताया कि एक साल पहले की तुलना में उनकी टाइम-टू-हायर प्रक्रिया तेज हुई है, जिसका एक प्रमुख कारण भर्ती प्रक्रियाओं में एआई का बढ़ता इस्तेमाल है। हालांकि, सही कौशल वाले उम्मीदवारों की उपलब्धता अब भी एक बड़ी चुनौती है। बदलती नौकरी आवश्यकताओं के बीच सही क्षमताओं वाले उम्मीदवारों को तलाशना मुश्किल हो रहा है, जिससे अपस्किलिंग और निरंतर सीखने में निवेश करना महत्वपूर्ण हो गया है।
क्षेत्रवार भारत का रोजगार परिदृश्य
भारत के सभी 9 सेक्टरों में नियोक्ताओं को आगामी तिमाही में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पिछली तिमाही की तुलना में 6 सेक्टरों में रोजगार बाजार मजबूत हुआ है, जबकि 3 सेक्टरों में इसमें कमजोरी आई है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7 सेक्टरों में नियुक्ति की उम्मीद मजबूत हुई है और 2 सेक्टरों में कमजोर हुई है।
- फाइनेंस एंड इंश्योरेंस और हॉस्पिटैलिटी ने Q4 2026 में क्रमशः 60% और 58% के साथ सबसे मजबूत NEO दर्ज किया। इसके बाद इन्फॉर्मेशन सेक्टर 57% पर रहा।
- भारत के सबसे प्रतिस्पर्धी सेक्टर फाइनेंस एंड इंश्योरेंस में पिछली तिमाही और Q4 2025 दोनों की तुलना में 4 प्रतिशत अंक की वृद्धि की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर इस सेक्टर में रोजगार संभावनाओं के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है और इसका आउटलुक वैश्विक औसत से 24 प्रतिशत अंक अधिक है।
- पिछली तिमाही की तुलना में सबसे अधिक 21 प्रतिशत अंक की वृद्धि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में दर्ज की गई। इसके बाद पब्लिक सेक्टर, हेल्थ एंड सोशल सर्विसेज में 15 अंक और ट्रेड एंड लॉजिस्टिक्स में 9 अंक की वृद्धि हुई।
- यूटिलिटीज एंड नेचुरल रिसोर्सेज में Q3 की तुलना में सबसे अधिक 23 अंकों की गिरावट रही। इसके बाद प्रोफेशनल, साइंटिफिक एंड टेक्निकल सर्विसेज में 3 अंकों की कमी दर्ज की गई।


